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स्वतंत्र भारत के राजनीति की अवधारणा सिद्ध करती भाजपा

स्वतंत्र भारत की राजनीति, राजनीतिक कार्यक्रम व गतिविधियां कैसी हो इस बारे में जितना चिंतन और उसका क्रियान्वयन होना था,कमोवेश वह नहीं हो पाया। छह दशक से ज्यादा लगातार कांग्रेस सत्ता में बने रहने के कारण राजनीति का भी कांग्रेसीकरण हो गया। जैसी कांग्रेस होती गई वैसे ही राजनीति की चाल ढाल बनती गई।

राजनीति में होने के मायने कांग्रेस जैसा होना हो गया । अगर आप सत्ता में हैं तो कांग्रेस नेता जैसा आपका रसूख सरकारी दफ्तरों में होना चाहिए। आपने जो चाहा वैसा निर्णय होना चाहिए।

चलना-फिरना, कुर्ता पजामा, गमछा और अब तो गाड़ी, मोबाइल, चश्मा सब कुछ मापदण्ड बन गए। उदाहरण बन गए। गाड़ी बंगला आपकी नौकरी व्यवसाय के आधार पर नहीं राजनीति में पद के आधार पर तौले जाने लगे।
शरद जोशी जी का लिखा व्यंग्य उदाहरण बन गया कि” ..एक दिन सबको कांग्रेस हो जाना है।” हालांकि मैं शरद जोशी जी के व्यंग्य से कभी सहमत नहीं हुआ। उस समय के हालात के अनुसार भविष्य का आकलन उसी तरह सोच कर किया जा सकता था, जैसा उन्होंने किया।

उस समय कोई नहीं सोच सकता था कि देश राजनीति और देश के चिंतन के आधार पर कोई दल चल-बढ़ सकता है। बहुमत की दम पर लगातार सरकार में कोई दल रहकर अपनी देशी सोच को पुनर्स्थापित कर सकता है।

आज जब समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कुआ-बावड़ी, तालाब की गंदी की भरे दृश्य फिर साफ करते भाजपा कार्यकर्ता और उसके बाद में स्वच्छ हमारे जल स्रोत दिखते हैं तो राजनीतिक दल होने के मायने समाज को समझ आते हैं। प्लास्टिक बीनना, झाड़ू लगाना, फावड़ा चलाना यह उपक्रम मात्र एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह पूरी अवधारणा है। इसे लखदख झकाझक कुर्ता पजामा पहनकर तो नहीं कर सकता। उसे अपने बनाये हुए आवरण को त्यागना होता है। उन जैसा बन जाना होता है जो नित्य यही सेवा करते आ रहे हैं। उनसे जुड़कर पूरे समाज के प्रति एकात्म भाव बनने लगता है। डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी की वैचारिक संकल्पना और प . दीनदयाल उपाध्याय जी की संगठन सेवा साधना अब सच्चे अर्थों में साकार रूप ले रही है। भाजपा अब सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन का उपकरण बनने के साथ ही राजनीति के भारतीयकरण में नेतृत्व कर अपने होने के सही उद्देश्य सिद्ध कर रही है।

पर्यावरण के प्रति चेतना का जागरण नारों और भाषणों से नहीं बल्कि सुरक्षित वृक्षारोपण, जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन ,प्लास्टिक से मुक्ति से करने के लिए अपना श्रमदान जब सत्तारूढ़ भाजपा के कार्यकर्ता करते हैं तो निसंदेह समाज में राजनीति में होने के मायने संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने लगातार सरकार में आने के बाद स्वतंत्र भारत के राजनीतिक दल की अवधारणा को सिद्ध करने के लिए तमाम उपक्रम अभियान शुद्ध करने का काम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा किया है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा जी के मार्गदर्शन में ना केवल कोरोना काल में सेवा ही संगठन -2 बल्कि 21 जून योग दिवस से लेकर 23 जुलाई डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि और 6 जुलाई उनकी जन्म जयंती तक इस प्रकार की विशिष्ट कार्यक्रम की संकल्पना यथार्थ में परिणीत किये हैं।

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