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सेवा से संकल्प तक:मोदी के 25 वर्ष

जनसेवा से राष्ट्रसेवा 

नरेंद्र मोदी जी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के पच्चीस वर्ष पूरे होना अपने आप में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। किसी नेता का ढाई दशक तक लगातार सार्वजनिक जीवन के केंद्र में रहना और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना निश्चित ही अभिनंदन का विषय है। लेकिन इसे केवल इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति पच्चीस वर्ष तक सत्ता में रहा। समझने की जरूरत यह है कि इन ढाई दशकों में देश बदला, तकनीक बदली, परिस्थितियाँ बदलीं, सामाजिक चुनौतियाँ बदलीं, दुनिया बदली और लोगों की अपेक्षाएँ भी बदलीं। ऐसे समय में एक नेता का लगातार प्रासंगिक बने रहना निश्चित ही अध्ययन का विषय है। नरेंद्र मोदी जी के व्यक्तित्व को एक राजनेता और प्रशासक के नाते देखें तो प्रश्न उठता है कि आखिर वे कौन से गुण हैं, जिनके कारण वे इतने लंबे समय के बाद भी देश की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में बने हुए हैं?मेरी दृष्टि में इसका सबसे बड़ा कारण है – समय को समझना, समय के साथ बदलना और समय के अनुकूल निर्णय लेने का साहस।

समय को समझने वाला नेतृत्व

ढाई दशक पहले की परिस्थितियाँ और आज की परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं। तकनीक पूरी तरह बदल गई है, समाज की आकांक्षाएँ बदली हैं, संचार के साधन बदले हैं, अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदला है और दुनिया की राजनीति भी बदल गई है।ऐसे में किसी नेता का एक ही तरीके से चलते रहना संभव नहीं है। नरेंद्र मोदी जी की विशेषता यह रही है कि वे लगातार समय के अनुकूल परिवर्तन करते रहे हैं। समाज का अध्ययन करते हैं, नई परिस्थितियों को समझते हैं और समय-समय पर नीतियों और नियमों में बदलाव करने से पीछे नहीं हटते।तकनीक को उन्होंने चुनौती के रूप में नहीं, अवसर के रूप में देखा। शोध और आविष्कार से पीछे हटने के बजाय उन्हें भारत की शक्ति बनाने का प्रयास किया। नई पीढ़ी के साथ संवाद किया, उसकी आकांक्षाओं को समझा और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाया।

वैचारिक स्पष्टता के बीच नरेंद्र मोदी

किसी भी देश का नेतृत्व केवल योजनाएँ बनाने से नहीं होता। जब देश के भीतर और बाहर वैचारिक संघर्ष हो, तब नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा होती है।भारत ने लंबे समय तक ऐसी राजनीति भी देखी है जिसमें देश की समस्याओं को देखने का एक निश्चित वैचारिक चश्मा रहा। वामपंथी विचारधारा की धमाचौकड़ी ने भी लंबे समय तक देश के बौद्धिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया। राष्ट्र, संस्कृति, विकास, गरीबी, सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर अनेक प्रकार के विमर्श खड़े किए गए। ऐसे वातावरण में नरेंद्र मोदी जी ने एक स्पष्ट वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत की- राष्ट्र प्रथम, विकास के साथ गरीब कल्याण, मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीक के साथ आधुनिक भारत और अपनी संस्कृति के प्रति आत्मविश्वास। यह वैचारिक स्पष्टता केवल भाषणों में नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं में दिखाई देती है। जब देश के भीतर और बाहर तमाम प्रकार की उलझनें हों, संघर्ष दिखाई पड़ते हों और दुनिया स्वयं भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही हो, तब एक वैचारिक रूप से स्पष्ट और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नेता देश के सामने समाधान के रूप में प्रस्तुत होता है। आज दुनिया भारत को केवल एक विकासशील देश के रूप में नहीं देखती। भारत अपनी बात कहने वाला, अपने हितों की रक्षा करने वाला और वैश्विक समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाने की क्षमता रखने वाला देश बनकर सामने आया है।

आर्थिक महाशक्ति बनता भारत

भारत की इस बदलती भूमिका का सबसे बड़ा आधार उसकी आर्थिक शक्ति है। भारत आर्थिक रूप से तेज गति से आगे बढ़ रहा है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदमताल कर रहा है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, डिजिटल इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और नए उद्योगों में भारत अपनी नई पहचान बना रहा है। दुनिया भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक शक्ति और भविष्य की महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है। भारत का आर्थिक विकास केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है। इसके पीछे बदलती हुई मानसिकता भी है—एक ऐसा भारत जो अवसर खोज रहा है, उद्यम कर रहा है, निवेश कर रहा है, तकनीक अपना रहा है और दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास रखता है। विकसित भारत का संकल्प इसी आर्थिक सामर्थ्य को आगे बढ़ाने का संकल्प है। यही कारण है कि भारत आज वैश्विक परिदृश्य में अपनी भूमिका केवल राजनीतिक या कूटनीतिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक सशक्त आर्थिक शक्ति के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

नई पीढ़ी : आकांक्षा से आत्मविश्वास तक

इस बदलते भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी है। आज की युवा पीढ़ी केवल नौकरी चाहने वाली पीढ़ी नहीं है। वह अपना उद्यम करना चाहती है, दुनिया के लिए नई तकनीक बनाना चाहती है, स्टार्टअप खड़ा करना चाहती है, अंतरिक्ष में जाना चाहती है और खेलों में दुनिया के सामने भारत का तिरंगा फहराना चाहती है। नरेंद्र मोदी जी ने इस आकांक्षा को समझा है। आज देश में स्टार्टअप्स हैं, इनोवेटिव आइडियाज हैं, स्पेस टेक्नोलॉजी है, खेलों में नई उपलब्धियाँ हैं। आइडिया से लेकर इनोवेशन तक भारत के इस बदलते स्वरूप में नरेंद्र मोदी जी की सोच और संकल्पना दिखाई पड़ती है। तकनीक के साथ कोई समझौता नहीं, शोध और आविष्कार से पीछे नहीं हटना और नई पीढ़ी के साथ संवाद करते रहना,यह नेतृत्व की उस क्षमता को दिखाता है जो भविष्य को केवल देखना नहीं, बल्कि उसके लिए आज से तैयारी करना चाहती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं

आर्थिक शक्ति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी किसी राष्ट्र की ताकत का आधार है। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी सुरक्षा के विषय में केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहेगा।सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और आपरेशन सिन्दूर जैसी आतंकवाद के विरुद्ध कठोर नीति ने भारत की सुरक्षा नीति में दृढ़ता का संदेश दिया। आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान भी इसी संकल्प का हिस्सा है। वर्षों से चली आ रही इस चुनौती को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने दृढ़ता के साथ काम किया है।राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं।यह नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व की स्पष्ट पहचान बनी है।

सत्ता को सेवा का उपकरण बनाना

नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व की एक और महत्वपूर्ण विशेषता है कि उन्होंने सत्ता को सेवा का उपकरण बनाने का प्रयास किया। गरीब के घर तक राशन पहुँचे, गरीब के सिर पर पक्का मकान हो, उसकी रसोई में गैस हो, उसके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा मिले, वह बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े, स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करे। इन सबको एक सेवा के रूप में मिशन मोड में चलाया गया। निःशुल्क राशन, पक्का मकान, पक्की रसोई, स्वास्थ्य बीमा, स्वरोजगार, वित्तीय समावेशन और शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव। इन सबको केवल सरकारी योजनाओं की सूची के रूप में देखना उचित नहीं होगा। इनके पीछे एक सोच दिखाई देती है कि शासन का लाभ उस व्यक्ति तक पहुँचे जो सबसे पीछे है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। यह केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि शासन की दिशा बताने वाला मंत्र बना। यहीं पर सत्ता और सेवा के बीच का अंतर समाप्त होता दिखाई देता है।

भारत का बढ़ता आत्मविश्वास

पच्चीस वर्षों की इस यात्रा को यदि किसी एक भाव में समेटना हो तो वह है- भारत के आत्मविश्वास में वृद्धि। आज भारत दुनिया के सामने अपनी बात अधिक मजबूती से रखता है। आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सजग है, नई तकनीक को अपना रहा है और अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ दुनिया के सामने खड़ा है। भू-राजनीतिक संकट के इस दौर में दुनिया भारत को एक ऐसे देश के रूप में देख रही है जो अपने हितों के साथ-साथ वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी भूमिका निभा सकता है। यह आत्मविश्वास केवल सरकार या दिल्ली में दिखाई नहीं देता।यह उस गरीब के जीवन में दिखाई देता है जिसे पहली बार पक्का घर मिला यह उस युवा में दिखाई देता है जिसने अपना स्टार्टअप शुरू किया। यह उस खिलाड़ी में दिखाई देता है जो विश्व मंच पर भारत का तिरंगा लेकर खड़ा होता है। यह उस वैज्ञानिक में दिखाई देता है जो भारत के लिए नई उपलब्धि हासिल करता है।यही आत्मविश्वास आज के भारत की सबसे बड़ी पूँजी है।

विकास के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण 

किसी राष्ट्र का उत्थान केवल उसकी अर्थव्यवस्था से नहीं होता। उसके भीतर अपनी संस्कृति, इतिहास और विरासत के प्रति आत्मविश्वास भी होना चाहिए। दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में नरेंद्र मोदी जी का योगदान भी महत्वपूर्ण है। भारत की संस्कृति, योग, हमारी परंपराएँ, हमारी विरासत और हमारी सभ्यतागत सोच को दुनिया के सामने रखने का प्रयास अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आर्थिक रूप से मजबूत भारत और सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी भारत। इन दोनों को साथ लेकर चलने की सोच इस नेतृत्व की विशेषता दिखाई देती है।

पच्चीस वर्षों की यात्रा का अर्थ

नरेंद्र मोदी जी के पच्चीस वर्षों को केवल सत्ता में रहने के वर्षों के रूप में देखना इस पूरी यात्रा को बहुत छोटा कर देना होगा। यह बदलते भारत के साथ चलने की यात्रा है। ढाई दशक में तकनीक बदली, परिस्थितियाँ बदलीं, सामाजिक चुनौतियाँ बदलीं, दुनिया की राजनीति बदली। लेकिन समय की आवश्यकता को समझकर अपने नेतृत्व को उसके अनुरूप ढालने की क्षमता बनी रही। यही कारण है कि हर दौर में नरेंद्र मोदी जी प्रासंगिक दिखाई देते हैं। एक ओर भारत आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। एक ओर नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को अवसर मिल रहे हैं, दूसरी ओर गरीब के जीवन में बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास हो रहा है। और इन सबके साथ भारत अपनी संस्कृति और अपनी पहचान के साथ दुनिया के सामने खड़ा है। भारत आज आत्मविश्वास के साथ उठ रहा है। विकसित भारत का संकल्प केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं है। यह उस भारत की आकांक्षा है जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीक में आगे हो, सुरक्षित हो, गरीब और कमजोर व्यक्ति को अवसर दे, अपनी संस्कृति पर गर्व करे और दुनिया में सम्मान के साथ खड़ा हो।नरेंद्र मोदी जी के पच्चीस वर्षों के सार्वजनिक जीवन को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है। यह केवल एक नेता के पच्चीस वर्षों की यात्रा नहीं है।यह बदलते भारत, बढ़ते भारत और आत्मविश्वास के साथ खड़े होते भारत की भी यात्रा है।

 

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